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बुधवार, 3 जून 2026
सुंदर समाज की कल्पना
मेरे विचार में
घर परिवार और रिश्तों की पूरी समझ न होने पर विवाह के बंधन में बंधना ही नहीं चाहिए ।
आधी समझ , आधी तैयारी से इस समाजिक कर्म को करना समाज को कमजोर बनाता है ।
एक मजबूत परिवार के लिए पति पत्नी नींव की ईंट की तरह होते हैं ।
सुदृढ़ समाज के लिए अटल विश्वास के साथ विवाह के बंधन में बँधना चाहिए ।
सूरज उतरा मेरे अंगना
पहले पहर का सूरज उतरा मेरे अँगना
सुबह सवेरे घर भर में खनके मेरा कंगना
अन्नपूर्णा बन सब की क्षुधा को शांत मैं करती
साँझ के सूरज की लाली जीवन को समृद्धि से भरती
माथे पर सुनहरी स्वेद कणों के मोती ढुलकते और चमकते
सूरज की लाली से मेरी सूरत भी दमकती और निखरती !!
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