"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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बुधवार, 3 जून 2026
सुंदर समाज की कल्पना
मेरे विचार में
घर परिवार और रिश्तों की पूरी समझ न होने पर विवाह के बंधन में बंधना ही नहीं चाहिए ।
आधी समझ , आधी तैयारी से इस समाजिक कर्म को करना समाज को कमजोर बनाता है ।
एक मजबूत परिवार के लिए पति पत्नी नींव की ईंट की तरह होते हैं ।
सुदृढ़ समाज के लिए अटल विश्वास के साथ विवाह के बंधन में बँधना चाहिए ।
सूरज उतरा मेरे अंगना
पहले पहर का सूरज उतरा मेरे अँगना
सुबह सवेरे घर भर में खनके मेरा कंगना
अन्नपूर्णा बन सब की क्षुधा को शांत मैं करती
साँझ के सूरज की लाली जीवन को समृद्धि से भरती
माथे पर सुनहरी स्वेद कणों के मोती ढुलकते और चमकते
सूरज की लाली से मेरी सूरत भी दमकती और निखरती !!
मंगलवार, 16 दिसंबर 2025
मैं हूँ इक लम्हा (काव्य संग्रह )
मैं हूँ इक लम्हा जो अपने लफ्जों को इंद्रधनुषी सोच से सजा कर मन की बात रखता है सबके सामने । सोच का सैलाब उमड़ता है छोटी बड़ी लहरों जैसे और कविता के रूप में कई भाव जन्म लेने लगते हैं । लिखना तो बचपन से ही शुरू हो गया था लेकिन कविता कब से लिखनी शुरू की इसकी सही तारीख बताना मुश्किल होगा।
बड़े बेटे वरुण का मानना है कि हर कविता का जन्म उसके अंदर छिपी किसी न किसी कहानी से होता है और कविता लिखते वक्त उस कहानी का जिक्र होना ज़रूरी है । इस बात से सहमत होकर उसी वक्त सोच लिया कि पूरी कोशिश करूंगी कि हर कविता के जन्म के पीछे की कहानी को अच्छे से कह पाऊँ । इस कोशिश में छोटा बेटा विद्युत और जीवनसाथी विजय ने पूरा साथ दिया । छोटे बहन भाई बेला और चंद्रकांत अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर हमेशा कुछ न कुछ प्रतिक्रिया भेजते रहते जिससे लेखन में सुधार करने की कोशिश रहती । मेरे लेखन को पुस्तक के रूप में देखने का सपना लेकर पिता इस दुनिया को अलविदा कह गए और माँ आज भी समीक्षक बन कर मेरे लेखन को कभी नकार देती है तो कभी तारीफ करती है । परिवार और दोस्तों का तहे दिल से शुक्रिया जिनके कारण मेरे शब्दों को खूबसूरत बसेरा मिला । एक पुस्तक में एक साथ मिल कर सभी शब्द और उनके भाव कैसा महसूस कर रहे होंगे , उसकी खुशी मेरे मन में कहीं ज्यादा है ।

