Thursday, May 19, 2011

डायरी के पुराने पन्ने


कुछ पुराने ड्राफ्ट जिन्हें एक एक करके मुक्त करने की सोच रही हूँ ....  यह सबसे पुराना ड्राफ्ट 3 जुलाई 2008 का लिखा हुआ  है..... जस का तस पब्लिश कर रही हूँ .... कुछ ड्राफ्ट अधूरे हैं उन्हें पोस्ट करने से शायद वे भी अपने आप में पूरे हो जाएँ..... 
इस वक्त शाम के 6 बजे हैं. छोटा बेटा दोस्तों के साथ बाहर है ... बड़ा बेटा वरुण और हम घर में ...कई दिनों के बाद आज मौका मिला कि इत्मीनान से कुछ लिखें लेकिन पढ़ने का मोह लिखने से रोक देता है. अभी की बात ही लीजिए... ज्ञान जी की पोस्ट पढ़ कर हम सोचने पर मज़बूर हो गए... " कोई मुश्किल नही है इसका जवाब देना। आज लिखना बन्द कर दूं, या इर्रेगुलर हो जाऊं लिखने में तो लोगों को भूलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।"
हम अपनी बात करें तो इस बात का बिल्कुल भय नहीं है क्योंकि हम उलटा सोचते हैं...कोशिश में रहते हैं कि हम किसी को भूलें... अच्छी बुरी यादों के साथ सब हमारे दिल में रहें... हम किसी के दिल में हैं या नहीं... किसी को हमारी ज़रूरत है कि नहीं इससे ज़्यादा ख्याल यह रहे कि दूसरे को लगता रहे कि उसकी ज़रूरत हमें है......

ब्लॉग जगत के बारे में सोचते हैं... अच्छा लगता है पढ़ना , जानना, समझना,,, इसी में ही वक्त बीत जाता है और लिखने की बस सोचते ही रह जाते हैं. ज्ञान जी की पोस्ट पढ़ने के बाद समीर जी की छोटी सी पोस्ट पढ़ने को मिली.... छोटी सी लेकिन भाव बहुत बड़ा लिए हुए .... सोचने लगे  कि हम 'हैरान पाठक ' तो हैं ही साधारण से  'हिन्दी ब्लॉगर' भी हैं .... सब काम छोड़कर लिखने बैठ गए..सोचा कि आँखें खराब होने पर भी समीर जी अगर छोटी सी पोस्ट ठेल सकते हैं तो क्यों हम  भी एक पोस्ट डालकर दोस्तों को बोर कर दें.. ..
सुखनसाज़ में हुसैन भाइयों की गज़ल सुनते सुनते शुरु हुए... बहुत दिनों पहले लिखी हुई कई रचनाएँ जो सिर्फ डायरी के पन्नों में ही कैद हैं ...उनकी याद गई.... विचार आया कि क्यों उन पुराने पलों को पन्नों की कैद से मुक्ति दे दी जाए लेकिन किश्तों में ही .... बहुत पुरानी बात याद रही है जब छोटे बेटे की बाहरवीं का रिज़ल्ट आना था .... आलोक जी की एक पोस्ट "टीचर की डायरी" पढ़कर अपने दोनों बेटों की याद गई जिन्हें हमने कभी नहीं कोसा कि 90% अंक लाने वाले बच्चों में उनका शुमार क्यों नहीं.... लाइफ के झटकों को झेलने के लिए मजबूती जिस व्यक्तित्व से आती है, वह गढ़ने का काम हो कहां रहा है।स्कूल बिजी हैं टापर गढ़ने में। पेरेंट्स बिजी हैं सुपर टापर बनाने में। व्यक्तित्व विकास के बुनियादी तत्व कहां से आयेंगे 


12 comments:

rashmi ravija said...

अच्छा लगा, देख ...यूँ यादो को समेटना...कई सारे पुराने लिंक भी मिले....अभी पढ़ती हूँ सारे..

shikha varshney said...

सही कह रही हैं आप ..बच्चों को सुपर इंसान बनने के चक्कर में इंसान बनाना ही भूल जाते हैं हम.

Sunil Kumar said...

सत्य कहा आपने इस जीवन कि आपाधापी में हम बहुत कुछ भूल जाते है | यादों को संजोना चाहिए
आभार........

Manoj K said...

had we realised the importance of the little elements which are really really significant,the world could have been a better place.

looking forward to more of your diary pages..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी डायरी के पुराने पन्नों के साथ कुछ और रोचक पोस्ट भी पढ़ने को मिलीं ...आभार

Udan Tashtari said...

सच कह रही हैं..और अच्छा किया एक पन्ना डायरी से यहाँ तक पहुँचा...धीरे धीरे इसी तरह बाकी भी लाते रहें, शुभकामनाएँ.

डा० अमर कुमार said...

..मीनाक्षी जी, उबार लिया आपने..
मेरे पास भी कुछ ( 30-35) आलेख ड्राफ़्टियाना मोड में अधूरे पड़े हुये हैं, डिलीट कर देने की सोचता हूँ... पर एक मोह व्यापता है ।
इस असमँजस की स्थिति से स्थिति से आपने उबार लिया... मैं भी उन्हें नेट का स्वछँदता में विचने को एक एक कर छोड़ता हूँ ।
आपका आलेख पुराने दिनों कि चिकिर-पिकिर की याद दिलाता है ।

रश्मि प्रभा... said...

kuch saheje pannon me kisi badlaw ki zarurat nahi hoti , aur we hamesha seekh de jati hain ... yah panna bahut khaas hai ki aapne dono bachchon ki tulna kisi se nahi ki ... samuchit vikaas ke liye yah zaruri hai

Gyandutt Pandey said...

इतना सुन्दर उपयोग ड्राफ्ट पोस्ट का! मुझे मलाल हो रहा है कि अपनी बहुत सी ड्राफ्ट पोस्टें खारिज कर दी हैं समय के साथ! :(

मीनाक्षी said...

@रश्मि,,यादों का पिटारा बार बार खोलना शायद सबको भाता है...
@शिखा,,अपने हाथों अपने बच्चे ही इंसान बन पाएँ तो जीवन जैसे सफल हुआ...
@सुनीलजी,,,इस आपाधापी में ही यादें मन को सुकून देती हैं.
@मनोजजी,,सच है कि छोटी छोटी बातों से ही दुनिया बेहतर बन सकती है.
@संगीतादी..आपका आना भी अच्छा लगता है..

मीनाक्षी said...

@समीरजी,,एक पन्ने के पीछे सभी पन्ने निकलेंगे...अभी तक यही उम्मीद है...
@डॉअमर...30-35ड्राफ्ट....आपकी ही कृति..अच्छा किया जो डिलीट नहीं किया...पंछी बन उन्हें उड़ने दीजिए..ब्लॉग़जगत के आसमान पर..
@रश्मिजी..हर बच्चे के गुण अपने आप में खास होते हैं बस देखने भर की नज़र चाहिए..आपने महसूस किया..अच्छा लगा...
@ज्ञानजी...जो हो गया सो हो गया..जैसा भी है ड्राफ्टस भी तो आपका ही है..उसे भी अपने दिल में जगह दें...

Arvind Mishra said...

बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेव -यह भी कहा गया है