Tuesday, April 5, 2011

उन दोनों का रिश्ता कैसा अद्भुत है !


मैंने उसे देखा , मुझसे रहा न गया .......
मैं आगे बढ़ी और उसे बाँहों में भर लिया......

मैं उसे ही नहीं उसके दर्द को भी अपनी बाँहों में जकड़ रही थी........ 
धीरे धीरे उसका दर्द मेरे अन्दर उतरता जा रहा था ......
मेरी नस नस में पिघलता लावा सा.... 

मैं जड़ हो चुकी हूँ उसके दर्द से ........
लेकिन वह अभी भी दर्द में जकड़ा हुआ है....
दर्द ने उसके पूरे शरीर को अपने आग़ोश में ले  रखा है....

मेरी बाँहों के घेरे से अपने को आज़ाद करता है....
पूरी तरह से दर्द की गिरफ़्त में है....... 
उसे दानव सा दर्द भी अपना सा लगता है..... 

मैं चकित सी देखती रह जाती हूँ ......
उन दोनों का रिश्ता कैसा अद्भुत है !

11 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप ने उस कहावत का अपवाद प्रस्तुत कर दिया कि दर्द बाँटने से कम हो जाता है।
और यह कटु यथार्थ है।

kshama said...

Wah! Kayee baar dard baantne se kam nahee hota!

रचना said...

किसी के दर्द को कौन समझा हैं
किसी के दर्द को कौन बाँट सका हैं
फिर नाल से जुडा हैं जो
दर्द उसका सालता ही हैं
कहीं कहीं दर्द ही नाल बन जाता हैं
और अटूट रिश्ते मे बाँध जाता हैं

मीनू कविता बढ़िया हैं , भाव उससे भी बढ़िया बस एक कमी हैं दर्द कुछ ज्यादा हैं

Udan Tashtari said...

अपनों के दर्द को अहसासा है...सुन्दर कविता...

rashmi ravija said...

दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा होता है

rashmi ravija said...

दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा होता है

अनूप शुक्ल said...

अच्छा लिखा!

Manpreet Kaur said...

बहुत ही उम्दा शब्द है जी !मेरे ब्लॉग पर आये ! हवे अ गुड डे !
Music Bol
Lyrics Mantra
Shayari Dil Se

कंचन सिंह चौहान said...

:( :( :(

संजय भास्कर said...

सार्थक और भावप्रवण रचना।

कालीपद प्रसाद said...

दर्द का रिश्ता ही घनिष्ट रिश्ता होता है -सार्थक रचना।
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