"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
bahut khub meenakshiji,sach mein gehre bhav nishabdh bana dete hai.jaise hum apke haiku padhne ke baad ho jate hai.
मौन की भाषा को पढ़ा और समझा भी.
meenakshi jee, saadar suswaagatam. bas itna hee ki pichhle dino apnee library kee khamoshi bahut akhree. waapsi kaa shukriyaa. mujhe aapkaa kahnaa aap ke maun se jyaadaa bhaataa hai.
शब्दों से परेजहाँ भाव और हैंवे सपर्पित
स्नेह करे...बहुत कुछ कह दिया आपने ,अपने शुभचिन्तको के लिये.विक्रम
हमने आपके मौन को पढ़ा और आपने आभार जताया। दुनिया में ये मौन का शिष्टाचार ही क्यों न प्रचलित हो...
श्रेष्ठ अभिव्यक्ति का सुन्दरतम सोपान मौन ही है , इसमें कोई संदेह नही !
ऐसे सुंदर हाइकू पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। ब्लागों पर तो ढूंढने पर भी कठिन से दिखाई देते हैं।बधाई स्वीकारें।
बहुत मार्मिक व संवेदनापूर्ण अभिव्यक्ति धन्यवाद इस प्रस्तुति के लिए
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9 टिप्पणियां:
bahut khub meenakshiji,sach mein gehre bhav nishabdh bana dete hai.jaise hum apke haiku padhne ke baad ho jate hai.
मौन की भाषा को पढ़ा और समझा भी.
meenakshi jee,
saadar suswaagatam. bas itna hee ki pichhle dino apnee library kee khamoshi bahut akhree. waapsi kaa shukriyaa. mujhe aapkaa kahnaa aap ke maun se jyaadaa bhaataa hai.
शब्दों से परे
जहाँ भाव और हैं
वे सपर्पित
स्नेह करे...
बहुत कुछ कह दिया आपने ,अपने शुभचिन्तको के लिये.
विक्रम
हमने आपके मौन को पढ़ा और आपने आभार जताया।
दुनिया में ये मौन का शिष्टाचार ही क्यों न प्रचलित हो...
श्रेष्ठ अभिव्यक्ति का सुन्दरतम सोपान मौन ही है , इसमें कोई संदेह नही !
ऐसे सुंदर हाइकू पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। ब्लागों पर तो ढूंढने पर भी कठिन से दिखाई देते हैं।
बधाई स्वीकारें।
बहुत मार्मिक व संवेदनापूर्ण अभिव्यक्ति धन्यवाद इस प्रस्तुति के लिए
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