Monday, August 27, 2007

मैं या अहम्

मानव का "मैं" करुणा के रूप में ---

मैं झरना झर झर बहूँ ।
अमृत की रसधार बनूँ ।।
मैं तृष्णा को शान्त करूँ।
प्रेम बनूँ औ' हिय में बसूँ।।
मैं मलयापवन सी मस्त चलूँ।
मानव मन में सुगन्ध भरूँ।।
मैं सबका सन्ताप ग्रहूँ।
हिय के सब का शूल गहूँ।।
मैं ग्यान की ऊँची लपट बनूँ।
अवनि पर प्रतिपल जलती रहूँ।।
मैं विश्व की ऐसी शक्ति बनूँ।
मानव मन को करूणा से भरूँ।।


मानव का "मैं" अहम् के रूप में --

मैं ही मैं हूँ इस सृष्टि में,
और न कोई इस दृष्टि में,
ऐसा भाव किसी का पाकर,
मन सोचे यह रह रहकर,
मानव क्यों यह समझ न पाए,
क्षण भंगुर यह तन हम लाए।।
मैं सुन्दर हूँ और न कोई,
मैं सर्वगुण और न कोई,
मैंने पाया सब कुछ उत्तम,
मेरा यह सब तेरा क्या है ।।
ऐसा भाव किसी का पाकर,
मन सोचे यह रह रहकर,
मानव क्यों यह समझ न पाए,
क्षण भंगुर यह तन हम लाए।।


रियाद में शाम-ए-अवध के मंच पर मैंने पहली बार अपनी दोनों कविताएँ पढ़ी

12 comments:

arbuda said...

very nice, u r really a good writer. congrats n keep it up.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीया मीनाक्षी जी
नमस्कार !
आपके ब्लॉग समुद्र में डुबकियां लगाते हुए मिले इस पोस्ट रूपी मोती को पा'कर मन प्रसन्न हो गया ।
बहुत सुंदर कविताएं हैं ।

प्रथम कविता ने अधिक प्रभावित किया मुझे …
मानव मन को करुणा से भरूं …

आपकी सेवा में मेरी कुछ पंक्तियां सादर समर्पित हैं -


तू यहां आया है गर… तो नाम कुछ करता ही जा !
याद रक्खे ये जहां… तू काम वो करता ही जा !
हो ज़रा औरों को… तेरे होने का एहसास भी ,
भर सके ख़ुशियों से गर… दामन हर इक भरता ही जा !!


शुभकामनाओं सहित …
- राजेन्द्र स्वर्णकार

अनुपमा त्रिपाठी... said...

man ke dono bhaavon ka sunder chitran...

Anita said...

सुंदर भावों से भरी मन को छूने वाली रचनाएँ!

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही सुंदर भावाभिवय्क्ति....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दोनों रचनाएँ बहुत सुन्दर

वीना said...

यही समझ जाए तो क्या बात है....
दोनों रचनाएं सुंदर...

मीनाक्षी said...

आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया पुराने पन्नों पर भी नज़र डाली...

Yashwant Yash said...

कल 21/सितंबर/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

Smita Singh said...

waah kya baat hai...bahut khoob

Prabhat Kumar said...

बहुत बढ़िया....

Lekhika 'Pari M Shlok' said...

Sunder rachna .....