"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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मंगलवार, 21 जून 2016
प्रेम - Unconditional
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सागर की लहरों से बतियाती रेत पर लकीरें खींचती पीठ करके बैठी कोस रही थी चिलचिलाती धूप को सूरज की तीखी किरणें तीलियों सी चुभ रहीं थी...
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मंगलवार, 5 जुलाई 2011
गुलमोहर और ताड़
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मेरे घर के सामने हर रोज़ ध्यान लगाने की कोशिश करती हूँ .... आँखें खुलते ही शीशे की दीवार से पर्दा हटा देती हूँ ... दिखता है विस्तार ल...
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गुरुवार, 18 अक्टूबर 2007
धरा गगन का मिलन असम्भव !
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अम्बर की मीठी मुस्कान ने, रोम रोम पुलकित कर दिया उससे मिलने की चाह ने, धरा को व्याकुल कर दिया . मिलन असम्भव पीड़ा अति गहरी, धरा गगन की नियति ...
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गुरुवार, 6 सितंबर 2007
हरी भरी दूब
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हरी-हरी दूब पर इधर-उधर भागते बच्चों को कभी देखती तो कभी व्यास नदी के किनारे छप-छप करते नन्हीं-नन्हीं हथेलियों से एक-दूसरे पर पानी उछालते बच्...
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