Sunday, December 16, 2007

काश गन से गिटार बनाई जाए !


पिछली दिनों अपने देश में दिल दहला देने वाली घटना पढ़कर मन व्याकुल और विचलित हो गया. उस पर फुरसतिया जी का लेख पढ़कर चंचल मन सोचने लगा कि काश गन फैक्टरियाँ गन को अगर गिटार में बदलना शुरु कर दें तो कितना अच्छा हो... गिटार बनेगा तो संगीत का जन्म होगा, संगीत की साधना से संघर्ष का नाश होगा ..... संगीत के साधक शांति दूत बनकर खड़े हो जाएँगे और चारों ओर चैन और अमन फैल जाएगा. सपने देखने से कौन रोक सकता है..अच्छे सपने सच भी हो जाते हैं..... कहते हैं सपने देखो तो उन्हें सच करने की लालसा भी जागती है.
गन से गिटार बनाने की बात दिमाग में आते ही सोचा कि मेरे जैसे कोई और ज़रूर होगा जो ऐसा सपना देख रहा होगा या देख चुका होगा और उसे सच करने की कोशिश में लगा होगा. ऐसा सपना Cesar Lopez ने देखा और उसे सच करने को चल रहा था शांति की राह पर हथियार को संगीत का साधन बना कर. खोजने पर एक और नाम मिला पीटर तोष उसके पास भी M16 गन से बनी गिटार है.




(Escopetarra on display at the United Nations Headquarters.)
















सीज़र लोपैज़ कम्बोडियन संगीतकार हैं जो शांति कार्यकर्ता हैं. देश में होने वाली हिंसा को रोकने की कोशिश में लगा रहता हैं. विशेष रूप में कम्बोडिया की राजधानी बोगोटा में जब भी हिंसा होती वहाँ की गलियों में जा जाकर हिंसा के शिकार लोगों के लिए मधुर हल्का संगीत बजाने लगता.
एक बार बोगोटा के किसी क्लब पर हुए हमले के दौरान उसने देखा कि एक सिपाही राइफल को गिटार की तरह लेकर खड़ा है. बस उसे देखते ही उसे सूझा कि क्यों इन सभी बन्दूकों को गिटार में बदल दिया जाए. शांति लाने का इससे अच्छा उपाय क्या हो सकता था. फिर क्या था सीज़र अपनी सोच को मूर्त रूप देने में लग गया और बना डाली एक गिटार जो शांति चिन्ह के रूप में जानी जाती है.

(An escopetarra is a guitar made from a modified rifle, used as a peace symbol. The name is a portmanteau of the Spanish words escopeta (shotgun/rifle) and guitarra (guitar).

सन 2003 में पहली इलैक्ट्रिक गिटार विनचैस्टर राइफल से बनाई. उसके बाद पाँच एसकोपैट्रास बनाईं गईं जिसमें से एक कम्बोडियन संगीतकार जुऐन को, एक अर्जेंटीन संगीतकार फिटो पैज़ और एक संयुक्त राष्ट्र संघ में रखी गई.बोगोटा की सरकार को भी एक गिटार सौंपी गई. एक अपने लिए रखी जिसे बाद में ब्रेवरी हिल्स के फण्ड रेज़र्स को 17,000 डालर में बेच दी. संयुक्त राष्ट्र संघ को दी गई गिटार को 2006 की डिसआर्मामेण्ट की कोंफ्रेस की प्रदर्शनी में रखा गया.
लुइस एल्बैट्रो परडेस के सहयोग से विनचैस्टर राइफल से गिटार बनाने के बाद अब 2006 तक लोपैज़ ने AK-47 की बारह मशीन गन कम्बोडिया के पीस कमीशनर के ऑफिस से लेकर गिटार में बदल दीं हैं. शकीरा, कार्लोस संटाना और पॉल मैक्कार्टनी जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों को शांति-चिन्ह के रूप में दिए जाने का विचार है. दलाई लामा ने हथियार से बनाई हुई गिटार को लेने से मना कर दिया. लोपैज़ सोच रहा हैं कि स्वयं जाकर इस विषय पर बात करेगा. वह गन से गिटार को शांति चिन्ह में बदलने के उद्देश्य को विस्तार से बताना चाहता हैं.
यूट्यूब की वीडियो की भाषा समझ आए या न आए...लेकिन हम यह तो अनुभव कर ही सकते हैं कि दुनिया में कोई भी राइफल या पिस्तौल से जुड़ी हिंसा को पसन्द नहीं करता बल्कि अपने अपने तरीके से उसे रोकने का प्रयास करता है.

11 comments:

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

यह तो बढिया सोच है। और भी कई किस्म के वाद्य यंत्र बनाये जा सकते है। पर मुश्किल यह है कि हम आप के पास बन्दूक नही है और जिनके पास है उनके पास ऐसे विचार कहाँ?

Sanjeeva Tiwari said...

अच्‍छा लगा पढकर । लोपैज को हमारी शुभकामनायें ।

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

गांधी शायद इसे पढ़्ते तो बहुत पसंद करते।

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर है। आपकी जानकारी के लिये बता दें कि आर्डनेन्स फ़ैक्ट्ररियों में आजादी के बाद कप-प्लेट जैसी चीजें बनती थीं। देश पंचशील के नशे में था। चीन से पिटने क बाद तमाम फ़ैक्ट्रियां खुलीं।

parul k said...

bahut achichi jaankaari DIDI,lekin guitar aur bandook dono he samaaj ke liye zaruuri hai...haan ye alag baat hai ki guitar ka prayog banduuk se kahinnnnn zyaada hona chahiye

anuradha srivastav said...

काश........ सब इसी प्रकार सोच लेते।

बाल किशन said...

बहुत बढ़िया सोच है.
काश ऐसा हो जाय!

Sanjeet Tripathi said...

बहुत बढ़िया जानकारी ढूंढी है आपने।
बांटने के लिए आभार

पुनीत ओमर said...

स्वप्न उत्तम है और तस्वीरें तो अति उत्तम. पर संभवतया ये व्यवहारिक नहीं. इसका मर्म भी फुरसतिया जी ख़ुद कई बार समझा चुके हैं की किसी भी समाज के लिए बंदूक भी कितनी आवश्यक है.

महावीर said...

बहुत सुंदर! काश कि यह लेख और तस्वीरें किसी
उर्दू , फ़ारसी और अर्बी ब्लॉगों पर प्रकाशित हो जाए। संभव है कि पढ़ कर इन आतंकियों के ब्रेन वाश्ड दिमागों में कुछ असर हो जाए। जानकारी देने के लिए धन्यवाद।

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

मनुष्य के अंदर जो हिंसा की भावना है उसके विरुद्ध हम सब को कार्य करना चाहिये. यदि इस अभियान में काफी सारे लोग जुट जायें तो बहुत कुछ हो सकता है -- शास्त्री जे सी फिलिप


हे प्रभु, मुझे अपने दिव्य ज्ञान से भर दीजिये
जिससे मेरा हर कदम दूसरों के लिये अनुग्रह का कारण हो,
हर शब्द दुखी को सांत्वना एवं रचनाकर्मी को प्रेरणा दे,
हर पल मुझे यह लगे की मैं आपके और अधिक निकट
होता जा रहा हूं.