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गुरुवार, 4 सितंबर 2014
रविवार, 24 अगस्त 2014
फूल और पत्थर
मेरे घर के गमले में
खुश्बूदार फूल खिला है
सफ़ेद शांति धारण किए
कोमल रूप से मोहता मुझे ....
छोटे-बड़े पत्थर भी सजे हैं
सख्त और सर्द लेकिन
धुन के पक्के हों जैसे
अटल शांति इनमें भी है
मुझे दोनों सा बनना है
महक कर खिलना
फिर चाहे बिखरना हो
सदियों से बहते लावे में
जलकर फिर सर्द होकर
तराशे नए रूप-रंग के संग
पत्थर सा बनकर जीना भी है !!
बुधवार, 16 जुलाई 2014
ना लफ़्ज़ खर्च करना तुम, ना लफ़्ज़ खर्च हम करेंगे
ना लफ़्ज़ खर्च करना तुम
ना लफ़्ज़ खर्च हम करेंगे ---------
ना हर्फ़ खर्च करना तुम
ना हर्फ़ खर्च हम करेंगे --------
नज़र की स्याही से लिखेंगे
तुझे हज़ार चिट्ठियाँ ------
काश कभी ऐसा भी हो कि बिना लफ़्ज़ खर्च किए कोई मन की बात सुन समझ ले. लेकिन कभी हुआ है ऐसा कि हम जो सोचें वैसा ही हो...
बस ख़ामोश बातें हों ...न तुम कुछ कहो , न मैं कुछ कहूँ .... लेकिन बातें खूब हों.... नज़र से नज़र मिले और हज़ारों बातें हो जाएँ....
मासूमियत से भरे सपनों के पीछे भटकना अच्छा लगता है...गूँगा बहरा हो जाने को जी चाहता है...जी चाहता है सब कुछ भूलकर बेज़ुबान कुदरत की खूबसूरती में खो जाएँ ......
फिल्म "बर्फी" का यह गीत बार बार सुनने पर भी दिल नहीं भरता...
काश कभी ऐसा भी हो कि बिना लफ़्ज़ खर्च किए कोई मन की बात सुन समझ ले. लेकिन कभी हुआ है ऐसा कि हम जो सोचें वैसा ही हो...
मासूमियत से भरे सपनों के पीछे भटकना अच्छा लगता है...गूँगा बहरा हो जाने को जी चाहता है...जी चाहता है सब कुछ भूलकर बेज़ुबान कुदरत की खूबसूरती में खो जाएँ ......
फिल्म "बर्फी" का यह गीत बार बार सुनने पर भी दिल नहीं भरता...
सोमवार, 30 जून 2014
इक नए दिन का इंतज़ार
हर नया दिन सफ़ेद दूध सा
धुली चादर जैसे बिछ जाता
सूरज की हल्दी का टीका सजा के
दिशाएँ भी सुनहरी हो उठतीं
सलोनी शाम का लहराता आँचल
पल में स्याह रंग में बदल जाता
वसुधा रजनी की गोद में छिपती
चन्दा तारे जगमग करते हँसते
मैं मोहित होकर मूक सी हो जाती
जब बादल चुपके से उतरके नीचे
कोमल नम हाथों से गाल मेरे छू जाते
और फिर होने लगता
इक नए दिन का इंतज़ार .....!
शनिवार, 28 जून 2014
छोटे बेटे के जन्मदिन पर पूरा परिवार एक साथ !
पिछले महीने बड़े बेटे वरुण का जन्मदिन था. आज छोटे बेटे विद्युत का जन्मदिन है. अपनी डिजिटल डायरी में विद्युत का ज़िक्र दिल और दिमाग में उठती प्यार की तरंगों को उसी के नाम जैसे ही बयान करने की कोशिश कर रही हूँ .....
कल दोपहर विजय रियाद से पहुँचे , एक साथ पूरे परिवार का मिलना ही जश्न जैसा हो जाता है. एक साथ मिल कर बैठना और पुरानी यादों को ताज़ा करने का अपना ही आनन्द है. मदर टेरेसा की एक 'कोट' याद आ रही है.
बड़े बेटे ने इलैक्ट्रोनिक्स में इंजिनियरिंग की लेकिन छोटे का रुझान कला के क्षेत्र में था इसलिए उसने विज़ुयल ग्राफिक्स की डिग्री ली. किसी भी काम को अच्छी तरह से करने की दीवानगी ही सफलता की ओर ले जाती है फिर काम चाहे कैसा भी हो. अगर अपनी मनपसन्द का काम हो तो उसे करने का आनन्द दुगुना हो जाता है.
मुझे याद आता है ग्यारवीं में स्कूल की कैंटीन का मेन्यू बोर्ड को अपनी कलाकारी से निखार कर बिरयानी, समोसे और पैप्सी के रूप में पहली कमाई का ज़िक्र किया तो खुशी हुई थी. उन्हीं दिनों मॉल में 15 दिन के लिए जम्बो इलैक्ट्रोनिक्स में नौकरी की, जिससे माता-पिता और पैसे की कीमत का और ज़्यादा पता चला. अपनी कमाई से अकूस्टी ड्रम सेट खरीदा , उसे बेचकर कैमरा .... इस तरह पढ़ाई के दौरान कई बार बीच बीच में छोटे छोटे काम करके अपनी कमाई का मज़ा लेता बहुत कुछ सीखता चला गया.
आज अपनी ही मेहनत से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा है. नित नया सीखने की ललक देख कर खुशी होती है. कुछ बच्चों को पता होता है किस रास्ते पर चल कर वे अपने लक्ष्य को पा सकते हैं. विद्युत भी उनमें से है जिसे बचपन से ही पता था कि उसे क्या करना है.
कल और आज की कुछ तस्वीरें कहती हैं उसकी कहानी ....
ढेर सारे प्यार और आशीर्वाद के साथ विद्युत की पसंद का एक गीत ......
कल दोपहर विजय रियाद से पहुँचे , एक साथ पूरे परिवार का मिलना ही जश्न जैसा हो जाता है. एक साथ मिल कर बैठना और पुरानी यादों को ताज़ा करने का अपना ही आनन्द है. मदर टेरेसा की एक 'कोट' याद आ रही है.
" What can you do to promote world peace? Go home and love your family" Mother Teresa
बड़े बेटे ने इलैक्ट्रोनिक्स में इंजिनियरिंग की लेकिन छोटे का रुझान कला के क्षेत्र में था इसलिए उसने विज़ुयल ग्राफिक्स की डिग्री ली. किसी भी काम को अच्छी तरह से करने की दीवानगी ही सफलता की ओर ले जाती है फिर काम चाहे कैसा भी हो. अगर अपनी मनपसन्द का काम हो तो उसे करने का आनन्द दुगुना हो जाता है.
मुझे याद आता है ग्यारवीं में स्कूल की कैंटीन का मेन्यू बोर्ड को अपनी कलाकारी से निखार कर बिरयानी, समोसे और पैप्सी के रूप में पहली कमाई का ज़िक्र किया तो खुशी हुई थी. उन्हीं दिनों मॉल में 15 दिन के लिए जम्बो इलैक्ट्रोनिक्स में नौकरी की, जिससे माता-पिता और पैसे की कीमत का और ज़्यादा पता चला. अपनी कमाई से अकूस्टी ड्रम सेट खरीदा , उसे बेचकर कैमरा .... इस तरह पढ़ाई के दौरान कई बार बीच बीच में छोटे छोटे काम करके अपनी कमाई का मज़ा लेता बहुत कुछ सीखता चला गया.
आज अपनी ही मेहनत से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा है. नित नया सीखने की ललक देख कर खुशी होती है. कुछ बच्चों को पता होता है किस रास्ते पर चल कर वे अपने लक्ष्य को पा सकते हैं. विद्युत भी उनमें से है जिसे बचपन से ही पता था कि उसे क्या करना है.
कल और आज की कुछ तस्वीरें कहती हैं उसकी कहानी ....
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| नन्हा फोटोग्राफर |
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| बचपन की कलाकारी |
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| कला की दुनिया में अभी बहुत सीखना है |
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