"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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Living Life in Lens
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गुरुवार, 29 नवंबर 2007
विछोह का दर्द और उसका उपाय
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अभी अभी टी.वी. पर सदा के लिए बिछुड़े अपने बेटे के लिए शेखर सुमन जी की आँखें नम होते देखीं, इसी के साथ याद आया नीरज जी और 21 वर्षीय दीपक जो ...
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मंगलवार, 27 नवंबर 2007
सब बेबस हैं !
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हम सब बेबस हैं। अपने ही गणतंत्र में लाचार। कुछ बेबस हैं वहशीपन की हद तक चले जाने को , कुछ बेबस हैं बस जड़ से होकर देखते रह जाने को --- मैंन...
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सोमवार, 26 नवंबर 2007
नारी मन के कुछ कहे , कुछ अनकहे भाव !
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मानव के दिल और दिमाग में हर पल हज़ारों विचार उमड़ते घुमड़ते रहते हैं. आज कुछ ऐसा ही मेरे साथ हो रहा है. पिछले कुछ दिनों से स्त्री-पुरुष से जुड़े...
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शनिवार, 24 नवंबर 2007
हे प्राण मेरे, आँखें खोलो !
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हे प्राण मेरे, आँखें खोलो सृष्टि को रूप नया दे दो ! कब तक निश्चल पड़े पड़े देखोगे कब तक खड़े खड़े ! हे प्राण ..................... उठो उठो ...
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शुक्रवार, 23 नवंबर 2007
व्यक्तित्त्व
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सामने से उसे आते देख मैं चौंक गई सुन्दर, सौम्य, मुस्काती नम्र नम आँखें चाल में शालीनता, चेहरे पर नहीं मलिनता किसी ने कहा - "देखते ही पत...
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बुधवार, 21 नवंबर 2007
मृत्यु का स्वागत करता 46 साल का प्रोफेसर(Dying Professor's Last Lecture)
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मुत्यु को इतने प्यार से मुस्करा कर कोई गले लगा सकता है इसका जीता जागता उदाहरण अमेरिका के कॉलेज का कम्पयूटर साइंस का प्रोफेसर 46 वर्षीय रैण्ड...
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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी ने कविता को 'कल्पना के कानन की रानी' कहा है.
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स्वाधीनता आन्दोलन के सन 1920 के बाद के दौर में नई पीढ़ी का यह नवीनता के प्रति मुग्ध आकर्षण अपने में अनेक पहलुओं को समेटे था जैसे कल्पनाशीलता,...
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