Sunday, September 7, 2008

एक साल का नन्हा सा चिट्ठा

एक डाल पर बैठा पंछी पंखों को खुजलाए
आसमान में उड़ने को जैसे ललचाए ....
की-बोर्ड का मन भी मस्ती से लगा मचलने
जड़ सी उंगलियाँ मेरी तेज़ी से लगीं थिरकने ....
मेरा चिट्ठा जैसे अभी कल ही जन्मा था
आज एक साल और दस दिन का भी हो गया........
घुटनों के बल चलता बालक जैसे रूठे, फिर ठिठके
वैसे ही खड़ा रहा थामे वक्त को .....
एक कदम भी आगे न बढ़ा
बस
अपने जैसे नन्हे बालक को देखता रहा
मुग्ध होता रहा ......
मोहित तो मैं भी थी उस नन्हे बालक पर
जो आया था ईरान से .....
तीन साल का नन्हा आर्यान हिन्दी से प्यार करता
हाथ जोड़कर नमस्ते कहता तो सब मंत्रमुग्ध हो जाते......
बड़ा बेटा वरुण भी उन्हीं दिनों इंजिनियर की डिग्री लाया
छोटे बेटे विद्युत ने अपने मनपसन्द कॉलेज में प्रवेश पाया ....
अर्दलान जो नन्हे आर्यान का बड़ा भाई , उसे भी नई दिशा मिली
गीत गाते गाते अपने देश से दूर विदेश में पढ़ने की सोची.....
बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में व्यस्त माता-पिता
पल भर भी न रुकते , बस चलते ही जाते जीवन पथ पर
एक सितम्बर आई तो दोनों हम साथी इक पल को रुके .....
जीवन पथ पर जीवन साथी बन कर बाईस साल चले हम
चलते चलते कब और कैसे इक दूजे के सच्चे दोस्त बने हम .....
और जीने का मकसद पाया, रोते रोते हँसने का हुनर भी आया .......

एक साल का नन्हा सा चिट्ठा भी मुस्काया
छोटे छोटे पग भरता मेरी बाँहों में दौड़ा आया .....

26 comments:

उन्मुक्त said...

साल पूरा करने की बधाई। अब कई साल पूरे करें और हम सब को खुशियों की चिट्ठियां पढ़वायें।

दिनेशराय द्विवेदी said...

हिन्दी ब्लागरी के दूसरे वर्ष में प्रवेश पर बधाई। सालो-साल इसी तरह यह साथ बना रहे।

अनूप शुक्ल said...

सालगिरह पर अनेकानेक बधाईयां!

Udan Tashtari said...

अहा!! साल पूरा हुआ...केक तो लाओ...ये कैसी सलगिरह...अब तो हम हिलेंगे नहीं जब तक केक न खिलाईयेगा!! बहुत ठसकू आईटम हैं...

सालगिरह पर निवेदन:


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निवेदन

आप लिखते हैं, अपने ब्लॉग पर छापते हैं. आप चाहते हैं लोग आपको पढ़ें और आपको बतायें कि उनकी प्रतिक्रिया क्या है.

ऐसा ही सब चाहते हैं.

कृप्या दूसरों को पढ़ने और टिप्पणी कर अपनी प्रतिक्रिया देने में संकोच न करें.

हिन्दी चिट्ठाकारी को सुदृण बनाने एवं उसके प्रसार-प्रचार के लिए यह कदम अति महत्वपूर्ण है, इसमें अपना भरसक योगदान करें.

-समीर लाल
-उड़न तश्तरी

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बधाई ..लिखे और खूब लिखे

रंजन said...

बधाई

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुंदर! सालगिरह की बधाई!

Anonymous said...

मुबारक !

सस्नेह
अन्नपूर्णा

रचना said...

bahut khub congrates

अफ़लातून said...

साल मुबारक ।

Parul said...

meenakshi DI, ko dherrrrrr saariiiiii badhayiiiiiiiii :)))

Gyandutt Pandey said...

बधाई हो जी। साल बड़ी जल्दी से गुजर गया। पर आपकी ब्लॉग उपस्थिति बहुत सशक्त बन गयी है।

मीत said...

DheroN BadhaaiyaaN .... YuuN hi saal dar saal beeteN ....

जितेन्द़ भगत said...

चि‍ट्ठे का साल मुबारक ।

Beji said...

लगा कोई इन्नोवेटिव स्टाईल में हैडलाईन्स पढ़ रहा है...इत्ता कुछ हो गया और एक पार्टी भी नहीं....
कुट्टी मिनाक्षीदी

MANVINDER BHIMBER said...

veri nice

Richa Joshi said...

एक साल की यात्रा पूरी होने पर शुभकामनाएं। ये सिलसिला अनंत तक चलता रहे।

Lavanyam - Antarman said...

मीनाक्षी जी ,
आप का लिखा हम सभी बहुत पसँद है बधाई हो प्रथम सालगिरह की और यूँही लिखती रहीयेगा
स स्नेह,
- लावण्या

अशोक पाण्डेय said...

चिट्ठे की सालगिरह पर बहुत बहुत बधाई।

अजित वडनेरकर said...

बधाई बहुत बहुत।
एक साल में यहां आकर बहुत कुछ पाया है हमने।

मीनाक्षी said...

इतने दिनों बाद लिखना और टिप्पणी पढना ऐसा लगता है जैसे पुराने दोस्त फिर मिल बैठे हों...आप सभी का बहुत बहुत आभार...

अनुराग said...

आहा ढेरो बधाई ....आप जैसे नेक इंसान चिट्ठो से जुड़े रहे ओर हमें आत्म्सम्बल देते रहे यही दुआ करते है......कैसे समेटा है आपने एक साल को.....प्रस्तुतीकरण एकदम लाजावाब .

अभिषेक ओझा said...

एक साल पूरा होने की बधाई !

mamta said...

मीनाक्षी जी पहले तो माफ़ी की कल हम आपको बधाई न दे सके।
एक साल पूरा होने की बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाये।

कंचन सिंह चौहान said...

mamata ji ke sath hi meri bhi maafi ki arzi ...aur di ko dhero badhaiya.n

मीनाक्षी said...

ममताजी, कंचन स्नेहमयी रिश्तों में माफी की कोई जगह नही होती...