"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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गुरुवार, 25 अक्टूबर 2007
तपता - हँसता जीवन !
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सूरज का अहम देख कर चन्द्र्मा मन ही मन मुस्करा उठा और सोचने लगा - अपनी आग से सूरज धरती को देता है नवजीवन ही नहीं मन-प्राण भी उसका झुलसा देता...
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