"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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सुलगे मन में
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गुरुवार, 7 अगस्त 2008
सुलगे मन में जीने की इच्छा सुलगी
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जले हुए तन से कहीं अधिक पीड़ा थी सुलगते मन की गुलाबी होठों की दो पँखुडियाँ जल कर राख हुई थीं बिना पलक की आँखें कई सवाल लिए खुली थीं माँ बाब...
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