"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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बुधवार, 3 अक्टूबर 2007
वजूद
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समझा, जाना और पहचाना मेरे वजूद को फिर भी बेदर्दी से नकारा मेरे वजूद को. निराहा, सराहा, प्यार किया तेरे वजूद को मन-प्राण से स्वीकारा तेरे ...
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