"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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गुरुवार, 13 सितंबर 2007
निराशा मुक्त (लिखने बैठी कविता एक )
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रसोई-घर से निकल , बैठी लेकर कागज़ पेन लिखने बैठी कविता एक , हास्य व्यंग्य की शब्द और भाव तलाश रही थी कि कि अचानक बड़े बेटे की पुकार आई ...
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