"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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सोमवार, 27 अगस्त 2007
मैं या अहम्
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मानव का "मैं" अहम् के रूप में -- मैं ही मैं हूँ इस सृष्टि में, और न कोई इस दृष्टि में, मैं ज्ञानी हूँ सब अज्ञानी सादी सच...
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