"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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गुरुवार, 18 अक्टूबर 2007
आत्मबल
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बैसाखियों के सहारे चलता सुन्दर युवक दिखा अनोखी आभा से उसका मुख था खिला-खिला. अंग उसके पीड़ा मे थे, तन का था बल छिना आँखों के जुगन...
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