"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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सोमवार, 31 दिसंबर 2007
मैं स्वार्थी हूँ
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नए साल में छुटकारा कैसे पाऊँ उससे ? लिखने का एक मुख्य कारण मेरा स्वार्थ है. मीर साहब और शेख साहब कहा करते थे कि दुयाओं में गज़ब का असर होता ...
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मंगलवार, 9 अक्टूबर 2007
एकांकी पलों की सुखद अनुभूति
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बहुत दिनों बाद आज अवसर मिला अकेले समय बिताने का , अपनी इच्छानुसार अपने आप से मिलने का एक अलग ही आनन्द है. ऐसा नहीं कि आस-पास के रिश्ते बोझ...
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