"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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गुरुवार, 23 मई 2013
अपनी सोच को पिंजरे में बंद रखना !
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अक्सर सोचती हूँ कि सोचूँ नहीं ..सोचों को मन के पिंजरे में कैद रखूँ लेकिन फिर भी कहीं न कहीं से किसी न किसी तरीके से वे कभी न कभी बाहर आ ह...
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सोमवार, 22 अप्रैल 2013
काली होती इंसानियत....
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अन्धेरे कमरे के एक कोने में दुबकी सिसकती बैठी सुन्न सहम जाती है फोन की घंटी से वह अस्पताल से फोन पर मिली उसे बुरी खबर थी जिसे...
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बुधवार, 1 जून 2011
ज़मीन और जूता
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एक मासूम सी उदास लड़की की खाली आँखों में रेगिस्तान का वीरानापन था सूखे होंठों पर पपड़ी सी जमी थी पर उसने पानी का एक घूँट तक न पि...
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