"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
मेरे ब्लॉग
(यहां ले जाएं ...)
हिन्दी सागर
Living Life in Lens
▼
प्यास प्रकृति की
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
प्यास प्रकृति की
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
बुधवार, 5 दिसंबर 2007
अमृत की ऐसी रसधार बहे !
›
तपती धरती , जलता अम्बर शीतलता का टूटा सम्बल आकुल है वसुधा का चन्दन रोती अवनि अन्दर अन्दर ! धरती प्यासी , अम्बर है प्यासा कण-कण है अमृत का प्...
10 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें