"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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त्रस्त
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बुधवार, 3 अक्टूबर 2007
सब हैं त्रस्त !
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जीवन की जटिल समस्याओँ को उलझते देख हम सब हुए हैँ पस्त कैसे सुलझाएँ उलझी गुथियोँ को उलझते देख हम सब हुए ...
4 टिप्पणियां:
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