"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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मंगलवार, 16 दिसंबर 2025
मैं हूँ इक लम्हा (काव्य संग्रह )
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मैं हूँ इक लम्हा जो अपने लफ्जों को इंद्रधनुषी सोच से सजा कर मन की बात रखता है सबके सामने । सोच का सैलाब उमड़ता है छोटी बड़ी लहरों जैसे और कवि...
शुक्रवार, 8 नवंबर 2024
मैं हूं इक लम्हा
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मैं हूं इक लम्हा मृत्यु अंधकारमय कोई शून्य लोक है या नवजीवन का उज्ज्वल प्रकाशपुंज है या मृत्यु-दंश है विषमय पीड़ादायक या अमृत-रस का पात्र ह...
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