"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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गुरुवार, 15 सितंबर 2011
आज की नई कविता का रूप सौन्दर्य 2
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आज की नई कविता का रूप सौन्दर्य निहारते हुए उसका बखान करने का तरीका सबका अपना अपना अलग हो सकता है.... जैसे तराशे हुए हीरे को सभी अपने अपने...
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मंगलवार, 21 जून 2011
'हरी मिर्च' के साथ 'स्वप्न मेरे' बन गए यादगार पल
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वीडियो से ली गई तस्वीर में मनीषजी और दिगम्बरजी महीनों या शायद सालों से मिलने की सोच सच में बदली तो खुशी का कोई ठिकाना ही न था.. बहुत द...
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