"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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करुणा भर दो
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करुणा भर दो
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सोमवार, 22 अक्टूबर 2007
करुणा भर दो ! ( तपन प्रकृति की )
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पृथ्वी के होठों पर पपड़ियाँ जम गईं पेड़ों के पैरों मे बिवाइयाँ पड़ गईं. उधर सागर का भी खून उबल रहा और नदियों का तन सुलग रहा. घ...
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