नहीं जानती कि क्यों वक्त बेवक्त ब्लॉग़ पर आना हो पाता है ..चाह कर , सोच सोच कर भी न आने का कोई खास कारण नहीं है लेकिन ज़िन्दगी बेतरतीब सी है यह पता चलता है.
खैर आज आने का खास कारण यह है कि जैसे ही मैंने अपना ब्लॉग खोला तो इस सन्देश को देख कर होश उड़ गए , कुछ समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ !
आप सब से शेयर करके शायद कोई सुराग मिले , यह सोच कर एक छोटी सी पोस्ट आपके सामने है .
खैर आज आने का खास कारण यह है कि जैसे ही मैंने अपना ब्लॉग खोला तो इस सन्देश को देख कर होश उड़ गए , कुछ समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ !
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जवाब देंहटाएंआपकी टिप्पणी पढ़कर तसल्ली हुई , शुक्रिया निशांत !
हटाएंStart self publishing with leading digital publishing company and start selling more copies
जवाब देंहटाएंself publishing india
Sabhi ko aaya hai, hame bhi
जवाब देंहटाएंएक बार हमारे ब्लॉग पुरानीबस्ती पर भी आकर हमें कृतार्थ करें _/\_
http://puraneebastee.blogspot.in/2015/03/pedo-ki-jaat.html