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रेत में डूबा रवि
प्याला हो जैसे
रेत में डूबा रवि
आधा भरा सा
धूल के कण
पत्तों पर पसरे
चमकीले से
सिर चढ़ती
धूल है नकचढ़ी
चिड़चिड़ी सी
धूल ही धूल
हवा तूफ़ानी तेज़
दम घुटता
धूसर पेड़
धूल भरी शाखाएँ
पत्तों पे गर्द
नभ ने ओढ़ा
धरती का आँचल
मटमैला सा
सुन्दर हाईकु!!
जवाब देंहटाएंvery beautiful
जवाब देंहटाएंधूल नकचढ़ी :)
जवाब देंहटाएंसारे के सारे हाइकु बढ़िया बन पड़े हैं...
जवाब देंहटाएंनकचढ़ी धूप ने ज्यादा मन मोहा..;)
ek se badhkar ek.....
जवाब देंहटाएंbalak 'shokhi' nahi karta....sachhi bolta.....
viswas na ho to gyan dadda se pooch len....
pranam.
बेहतरीन ......
जवाब देंहटाएंनकचढी धूप. बहुत खूबसूरत..
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर त्रिपद .....एक से बढ़ कर एक
जवाब देंहटाएंnakchadi dhoop sundar bhav chitr ,sabhi achchhe .
जवाब देंहटाएंक्या बात है...चेहरे पे मुस्कान आ गयी मेरे :)
जवाब देंहटाएंसभी हाइकू सुन्दर, भावपूर्ण...
जवाब देंहटाएंभाव उत्तम
जवाब देंहटाएंशिल्प मन भावन
शब्दों की माला.... !!
प्याला हो जैसे
जवाब देंहटाएंरेत में डूबा रवि
आधा भरा सा
वाह ! वाह ! वाह !
बहुत सुंदर त्रिपद्म ।
sundar rachna
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत शानदार
जवाब देंहटाएंमेरी नई पोस्ट देखें
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