"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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Living Life in Lens
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गुरुवार, 5 अगस्त 2010
मैं अपराधिनी.....!
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पिछली पोस्ट में अपने आप को अनफिट कहा क्योंकि अपने देश के साँचे में फिट होने के लिए तपने की ज़रूरत है, वैसा न करके हम पाप के भागीदार हो जात...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, 17 जून 2010
अपने देश के साँचें में अनफिट... !!!!!
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कई साल विदेश रहने के बाद लगता है कि अब अपने देश के साँचें में फिट नहीं हो पाते....दोस्त बना कर उल्लू सीधा करने में माहिर नहीं है इसलिए लग...
40 टिप्पणियां:
शनिवार, 12 जून 2010
आज भी उसे इंतज़ार है .. !
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एस.एम. बेहद खुश थी...बारटैंडर ने वोडका का तीसरा गिलास उसके सामने रख दिया था... तीसरे गिलास के बाद न पीने का...
19 टिप्पणियां:
मंगलवार, 8 जून 2010
मन ही मन वे बिखर रहे थे....!
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एक था मुन्ना , एक थी नन्हीं नट्खट मुन्ना, चंचल नन्हीं भाई बहन में कभी न बनती सुबह शाम झगड़े में कटती नए नए खिलौने आते मुन्ने को फिर भी न भा...
23 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 4 जून 2010
मेरे घर के आँग़न में
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एक जून , मंगलवार की रात शारजाह एयरपोर्ट उतरे.. ज़मीन पर पैर रखते ही जान में जान आई... जब भी हवाई दुर्घटना की खबर पढ़ते तो एक अजीब सी बे...
27 टिप्पणियां:
मंगलवार, 1 जून 2010
काश.... शब्दकोष में ‘वाद’ शब्द ही न होता
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ज़रूरी नहीं कि जो कहते नहीं,,,बोलते नहीं... या ब्लॉग पर लिखते नहीं...उन्हें समाज में हो रही घटनाओं से कुछ फर्क नहीं पड़ता.... सब अपने अपने त...
16 टिप्पणियां:
शनिवार, 29 मई 2010
गुस्सा बुद्धि का आइडेंटिटी कार्ड है
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इस पोस्ट का शीर्षक फुरसतिया ब्लॉग़ की पोस्ट ‘एक ब्लॉगर की डायरी’ से लिया गया है. नेट की परेशानी के कारण कुछ रचनाओं के प्रिंट आउट करवा कर ...
34 टिप्पणियां:
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