"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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हिन्दी सागर
Living Life in Lens
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शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2007
नया प्रयास - पहला हाईकू तस्वीर के साथ !
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मैंने थामा है शक्ति पुंज दिनेश दोनो हाथों में.
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मेरे प्यारे काका सर्प न्यारे हैं बड़े !
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माँ, आपकी अनुमति से आज अपनी इस कविता को पन्नों की कैद से आज़ाद कर रही हूँ. आज सुबह का पहला ब्लॉग जो खुला उसे पढ़कर बहुत सी पुरानी यादें ताज़...
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गुरुवार, 25 अक्टूबर 2007
तपता - हँसता जीवन !
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सूरज का अहम देख कर चन्द्र्मा मन ही मन मुस्करा उठा और सोचने लगा - अपनी आग से सूरज धरती को देता है नवजीवन ही नहीं मन-प्राण भी उसका झुलसा देता...
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बुधवार, 24 अक्टूबर 2007
ज़िन्दगी इत्तेफाक है !
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घर पहुँच कर राहत की साँस ली कि आज फिर हम बच गए. हर रोज़ बेटे को कॉलेज छोड़ने और वापिस आने में 80 किमी के सफर में कोई न कोई सड़क दुर्घटना का शिक...
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बात जो रास्ते का पत्थर थी !
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सुबह सुबह का अनुभव लिखने के बाद हम बैठे पढ़ने अलग अलग चिट्ठे. जितना पढते गए उतना ही अपने को पहचानते गए लगा कि शायद बहुत कुछ है जो अभी सीखना ह...
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मंगलवार, 23 अक्टूबर 2007
मधुशाला कहें या पाकशाला !
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अंर्तजाल पर आए थे जीवन के नए-नए पाठ पढ़ने , पहुँच गए चिट्ठाजगत की मधुशाला में. एक प्यारी सी सखी जो खुद एक चिट्ठाकार हैं जबरन ले आईं यहाँ और ब...
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सोमवार, 22 अक्टूबर 2007
करुणा भर दो ! ( तपन प्रकृति की )
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पृथ्वी के होठों पर पपड़ियाँ जम गईं पेड़ों के पैरों मे बिवाइयाँ पड़ गईं. उधर सागर का भी खून उबल रहा और नदियों का तन सुलग रहा. घ...
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