"प्रेम ही सत्य है"
"नारी-मन के प्रतिपल बदलते भाव जिसमें जीवन के सभी रस हैं। " मीनाक्षी
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हिन्दी सागर
Living Life in Lens
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रविवार, 30 सितंबर 2007
ऐसी शक्ति मिले !
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ख़ूने आँसू बहेँ तब भी आँखेँ हँसेँ तो क्या कहना ज़हर पीते रहेँ, मुस्कराते रहेँ तो क्या कहना .. ऐसी शक्ति मिले तो क्या कहना ! साँस घुटने लगे ज़िन...
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शनिवार, 29 सितंबर 2007
वसुधा की डायरी ३
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जब काले बादल मँडराते हैं , बिजली चमकती है , बादलों की गर्जना से धरती हिलने लगती है , जीवन में ऐसी स्थिति आने पर लगता है जैसे बिखरने में पल भ...
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शुक्रवार, 28 सितंबर 2007
वासन्ती वैभव
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वात्सल्यमयी वसुधा का वासंती वैभव निहार गगन प्यारा विस्मयविमुग्ध हो उठा। धानी आँचल में छिपे रूप लावण्य को आँखों में भर कर बेसुध हो उठा। सकुचा...
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गुरुवार, 27 सितंबर 2007
वसुधा की डायरी २
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आज वैभव का पहला पेपर था 'सोशल' जो सबसे मुश्किल माना जाता है। अच्छे अच्छे होशियार बच्चे भी घबरा जाते हैं। विलास को जूते पहनाते हुए सा...
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वसुधा की डायरी
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वसुधा ने आज निश्चय कर लिया था कि जो भी मन में भाव उठ रहे हैं , उन्हें भाप बन कर उड़ने न देगी । जैसे लहरें चट्टानों से टकराती शोर कर रहीं हों...
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सोमवार, 24 सितंबर 2007
चक्रव्यूह
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१५० कि०मी० की ड्राइव ने मुझे पस्त कर दिया था लेकिन पतिदेव के फोन आते ही कि वे दमाम ठीक-ठाक पहुँच गए हैं, मैंने चैन की साँस ली और सोने चली गई...
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सोमवार, 17 सितंबर 2007
राजनीति से दूर
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बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज के दूसरे साल में थी । पापा राज्य गृहमन्त्री के उप-सहायक के रूप में काम रहे थे। मन्त्री जी की बेटी मेरी हमउम...
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