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सोमवार, 17 मई 2010

त्रिपदम (हाइकु)

डरा कपोत

बिल्ली टोह में बैठी

बचेगा कैसे

**

सोचा मैंने भी

खामोश हूँ क्यों

बैठी जड़ सी

**

क्या मैं ऐसी हूँ

तटस्थ या नादान

भावुक जीव

**

पंछी आज़ाद

आँख कान थे बंद

ध्यान मग्न था

**

मैं-मैं या म्याऊँ

करते प्राणी सब

कौन मूर्ख

**

सभी निराले

गुण औगुण संग

स्वीकारा मैंने


14 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...

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  2. बड़े दिन बाद...आनन्द आया.

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  3. Tasveer aur rachnayen..sabkuchh bahut khoobsoorat hai!

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  4. कलात्मक सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  5. गुड हैं जी। वेरी गुड हैं।

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