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शनिवार, 28 मार्च 2009

कुछ मेरी कलम से भी ......
















उम्र....
कोरे काग़ज़ जैसी
कभी हरकत करती उंगलियों सी

कभी काँपती कलम सी ..!!

उम्र .....
खाली प्याले सी
कभी लबालब झलकती सी
कभी आखिरी बूँद को तरसती सी... !!



उम्र.....
सिगरेट के धुएँ सी
कभी लबों से कई रूप लेती सी
कभी सीने में सुलगती सी.. !

उम्र.....
पतझर का मौसम भी
वक्त के पैरों तले
चरमराते चीखते पत्तों सी ....!!

रंजना जी की लेखनी का शुक्रिया जिसके कारण मेरी कलम भी कुछ कह उठी ..!

19 टिप्‍पणियां:

  1. ये भी खूब रही। आपने भी बहुत अच्‍छा लिखा। रंजना जी को दाद देना चाहिए जो उन्‍होंने इतने दिनों से ठहरी हुई आपकी कलम को हरकत में ला दिया :)

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  2. सुभानाल्ह........क्या खूब कहा है ..क़त्ल !!!!!

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  3. सिगरेट के धुएं का बिम्ब बहुत प्रभावी है , पढ़ कर मज़ा आया .

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  4. उम्र

    चाहे किसको कितना भी कंपा दे

    पर मिले अनुभव आप सदा ही

    सबमें बांटे

    दूर हो जाएं जिससे

    उम्र में आने वाले कांटे।

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  5. उम्र ..
    यूँ ही
    कुछ बीतते पलों की
    तेरी मेरी बात कह गयी ...:)
    आपने तो उम्र के और भी सुन्दर रंगों को लफ्जों का जामा पहना दिया .शुक्रिया लिखने के अनुरोध को मानने का

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  6. उम्र.....
    पतझर का मौसम भी
    वक्त के पैरों तले
    चरमराते चीखते पत्तों सी ....!!
    waah bahut hi khubsurat

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  7. वाह! लगता है हर कोई उम्र के बारे में सोच रहा है।

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  8. वाह !!! क्या बात है....दोनों रचनाओं को एक जगह रख दिया जाय तो लाजवाब मुशायरा हो जायेगा.....
    बहुत बहुत सुन्दर लिखा है आपने...

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  9. उम्र - पोस्ट भी टिप्पणियां भी और सतत न लिखने का उलाहना भी!

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  10. बहुत ही बेहतरीन रचना बहुत ही सुंदर

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  11. इन शब्दो क़ी उम्र भी बहुत लंबी होगी.. और होनी भी चाहिए.. तभी तो हमारी उम्र लंबी होगी..

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  12. उम्र भी इतनी खूबसूरत अभिव्यक्ति ।

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