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सोमवार, 31 मार्च 2008

साँसों का पैमाना टूटेगा






















कभी हाथ में प्रेम का प्याला
गले से उतरे जैसे हो हाला

सीने में उतरे चुभे शूल सा
इक पल में फिर लगे फूल सा

पाश में बाँधे मोह का प्याला
कभी शूल सा कभी फूल सा

पल पल पीती प्रेम की हाला
रोम-रोम में जलती ज्वाला

*******************

साँसों का पैमाना टूटेगा
पलभर में हाथों से छूटेगा

सोच अचानक दिल घबराया
ख्याल तभी इक मन में आया

जाम कहीं यह छलक न जाए
छूट के हाथ से बिखर न जाए

क्यों न मैं हर लम्हा जी लूँ
जीवन का मधुरस मैं पी लूँ

(चित्र गूगल के सौजन्य से)




17 टिप्‍पणियां:

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  2. इतनी प्यारी कविता तो समझ में आती है पर इतने सुन्दर चित्र भी क्या स्वयं खींचे हैं।

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  3. Aapki kavita poori shayad paste nahi hui yahan par. aakhri pankti padhta hoon to lagta hai ki ek do shabd baaki hai. Please check.

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  4. achchhi kvita hai.schi bat hai agr jivan khtm hone se phle jee liya jaye to afsos nhi hoga mrte wqt..

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  5. बहुत उम्दा..बेहतरीन!!! बधाई.

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  6. जैसे हाथ मे प्रेम का प्याला

    बहुत मन को छू जाने वाली बहुत बढ़िया धन्यवाद

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  7. saanson ka pyala kab tute nahi kahbar har waqt madhurus pina chahiya,bahut sundar kavita hai,sandes bhi.

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  8. बहुत अच्छी - रचनाएं, और तस्वीर. देख / पढ़ कर बहुत अच्छा लगा. शुक्रिया.

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  9. शानदार!!
    कहां व्यस्त है आप इन दिनों, कम दिखाई पड़ रही है आपको पोस्ट!!

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  10. क्यों न मैं हर लम्हा जी लूँ
    जीवन का मधुरस मैं पी लूँ

    जीवन का सार कह दिया है इन दो पंक्तियों मे।

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  11. क्यों न मैं हर लम्हा जी लूँ
    जीवन का मधुरस मैं पी लूँ
    बहुत खुब, हर लम्हा वाह

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  12. सीने में उतरे चुभे शूल सा
    इक पल में फिर लगे फूल सा


    बहुत सुंदर प्रवाह है रचना में.. बधाई स्वीकार करे..

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  13. आप सबका धन्यवाद.
    @उन्मुक्त जी, गूगल से लिया चित्र है.
    @सबि जी , सुधार कर लिया है.
    @संजीत जी,पढ़ने में इतना डूब जाते है कि लिखने का होश ही नहीं रहता.

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  14. बहुत ही उम्दा कविता। और चित्र भी बहुत अच्छे है कविता के भाव पर पुरे बैठते है

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