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शनिवार, 15 दिसंबर 2007

प्रफुल्लित हुआ मन मेरा प्रशंसा आपकी पाकर !













त्रिपदम (हाइकु) नामकरण मन भाया सबके ,
यह पढ़कर मन मेरा अति हर्षाया

सकूरा जैसी मन-भावन सुन्दरता लेके,
जन्म लें त्रिपदम हर दिन मन में आया!

प्रफुल्लित हुआ मन मेरा प्रशंसा आपकी पाकर
त्रिपदम मेरे पढ़ने होंगे गहराई में जाकर !

भोर सुहानी
प्रकृति की नायिका
रवि मुस्काया
* * *
कुछ कहतीं
लहरें पुकारती
रहस्यमयी
* * *
जलधि जल
पानी का कटोरा सा
छलका जाए

11 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्‍दर, मीनाक्षी जी त्रिपदम को विकसित कीजिये । ऐसे ही हाईकू पर प्रयोग अनवरत चलता रहे । णन्‍यवाद ।

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  2. चलिए यह ठीक है. आप लिखें, हम गहराई में जाकर ही पढ़ेंगे..

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  3. त्रिपदम का धन्यवाद भी त्रिपदम में। कवियित्री को यह सहूलियत है। :-)
    गद्य लिखने वाला तो एक पैरा लिखे तो भी वह प्रभाव न आ पाये धन्यवाद में।

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  4. सुंदर!!

    वाकई ज्ञानदत्त जी का कहना सही है।

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  5. प्रसन्नता प्रफुल्लित
    खुश रहे मुदित मत तेरा
    प्रमाद न करे बसेरा


    त्रिपदम ने डाला
    मेरे मन पर भी डेरा
    जोर चला न मेरे मन पर मेरा

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  6. सुंदर है। पर ये अचानक नामकरण संस्कार की सूझी कैसे ....ज़रा इस पर कुछ बताइये। जिज्ञासा है, दिलचस्प भी होगा जानना। या हो सकता है संदर्भ सबको पता हो , सिर्फ मुझे नही। मैं ज़रा गाफिल रहता हूं, सो ऐसा होता है अक्सर । बताएं ज़रूर।

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  7. संजीव जी, संजय जी, ज्ञान जी, संजीत जी , अविनाश जी और अजित जी आप सबका धन्यवाद...

    ज्ञान जी गद्य गहरा सागर जैसा
    लेखन गम्भीर, चिंतन भी वैसा

    जुगनू नन्हा सा चमके जैसा !
    त्रिपदम बस जगमग करता वैसा!

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  8. बढ़िया है। हम भी हैं वाह-वाह कहने वालों में।

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  9. यूं ही कहीं देख लें बाग़
    तो दिल मचल जाता है
    फोटो में ही क्यों न देख लू वृक्ष
    शेर कहने का जजबात उमड़ आता है
    ------------------------------------------
    आपके यह कविता देखते ही यह शब्द मेरे मन में आये
    दीपक भारतदीप

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  10. जलधि जल
    पानी का कटोरा सा
    छलका जाए

    बहुत सुंदर ..

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  11. हाइकू कुछ हज़म नहीं हुए.

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