Saturday, April 20, 2013

सूरज और पौधे




सूरज

आसमान से नीचे उतरा
धरती के आग़ोश में दुबका
ध्यान-मग्न पौधों का ध्यान-भंग करता
हवा के संग मिल साँसे गर्म छोड़ता

पौधे

एक पल को भी विचलित न होते
झूम-झूम कर फिर से जड़ हो जाते...
फिर से होकर लीन समाधि में
सबक अनोखा सिखला जाते 


6 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

दोनों ही सुंदर विचार हैं

ARUN SATHI said...

साधू साधू

Sunil Kumar said...

bahut sundar ,badhai ....

दिगम्बर नासवा said...

सूरज ओर पौधे दोनों ही लाजवाब अपनी अपनी जगह ..
वैसे इन दोनों का साथ भी बहुत पुराना है ... शायद पृथ्वी के साथ ...

मीनाक्षी said...

सभी मित्रों का धन्यवाद...दिगम्बरजी....पृथ्वी है तो प्रकृति है और हमारा वजूद भी उसी के साथ है..

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुन्दर....शब्द नहीं हैं