Monday, May 17, 2010

त्रिपदम (हाइकु)

डरा कपोत

बिल्ली टोह में बैठी

बचेगा कैसे

**

सोचा मैंने भी

खामोश हूँ क्यों

बैठी जड़ सी

**

क्या मैं ऐसी हूँ

तटस्थ या नादान

भावुक जीव

**

पंछी आज़ाद

आँख कान थे बंद

ध्यान मग्न था

**

मैं-मैं या म्याऊँ

करते प्राणी सब

कौन मूर्ख

**

सभी निराले

गुण औगुण संग

स्वीकारा मैंने


15 comments:

pawan dhiman said...

प्रशंसनीय

Suman said...

nice

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

ये तो त्रिपदम् ग़ज़ल हो गई!

Arvind Mishra said...

बढियां

संजय भास्कर said...

बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...

Udan Tashtari said...

बड़े दिन बाद...आनन्द आया.

अनूप शुक्ल said...

बहुत खूब!

Prem Farrukhabadi said...

Bahut achchhe lage aapke haikoo.Badhai!!

प्रवीण पाण्डेय said...

त्रिपदम् गज़ल । वाह ।

kshama said...

Tasveer aur rachnayen..sabkuchh bahut khoobsoorat hai!

अभिषेक ओझा said...

वाह !
बहुत खूब !

रंजना said...

कलात्मक सुन्दर अभिव्यक्ति...

अरुणेश मिश्र said...

उत्कृष्ट हाइकू ।

अनूप शुक्ल said...

गुड हैं जी। वेरी गुड हैं।

डॉ .अनुराग said...

achha hai....is vidha me aor likhiye...