Monday, January 28, 2008

सपनों की नगरी मुम्बई में छह दिन !

छह दिन के बाद लौटे हैं ...! सब को मेरा प्रणाम ...!
सपनों की नगरी मुम्बई से माया नगरी दुबई में पहुँचते पहुँचते आधी रात हो गई थी इसलिए चाह कर भी आभासी दुनिया में न जा सकी. सुबह बच्चों को नाश्ता देकर सबसे पहले हम अपनी उसी दुनिया में पहुँचे जहाँ हम छह दिन से जा न सके थे.
सबसे पहले तो अनिता दी को प्रणाम, जिनकी स्नेहमयी ऊर्जा ने हमें नतमस्तक कर दिया. उनके लिए 'कुछ हम कहें' लेकिन शब्द ही नहीं मिल रहे. अभी अभी अनिता दी की पोस्ट पढ़ी, फिर से याद आ गई दो मुलाकातें जिन्हें हमने दिल में सहेज कर रख लिया है. हमने ही नहीं वरुण ने भी.
सपनों की नगरी मुम्बई से माया नगरी दुबई में लौटते हुए जैसे पीछे कुछ छूट रहा था. एयरपोर्ट जाने का समय हो रहा था लेकिन हम माँ बेटा दोनों ही होटल की खिड़की के पास खड़े होकर मुम्बई के सुनहरी से सुरमई होते आकाश को देख रहे थे. ठंडी हवा में पीपल के पेड़ की झूमती शाखाएँ पहले ही बॉय बॉय करने लगीं.
छह दिन छू मंतर करते उड़ गए थे. छोड़ गए मीठी यादों के निशान.
अभी जैसे कल ही एयरपोर्ट उतरे थे. प्री पेड टैक्सी से होटल वैस्ट एंड पहुँचते पहुँचते जैसे पूरा मुम्बई देख लिया. एयरपोर्ट से मरीन लाइंस तक जाते हुए 25-30 कि.मी. तक फ़ासला तय करना था. दर्द और थकावट ने बेटे वरुण को पस्त कर दिया था. बीच-बीच में हम बाहर देखते तो लगता कि शायद कोई जाना पहचाना आभासी दुनिया का कोई मित्र दिख जाए. वरुण हम पर हँस रहा था पर हमे बुरा नहीं लग रहा था. हमें सबको याद करके अच्छा लग रहा था, दूसरा दर्द से उसका ध्यान बँट रहा था.
होटल पहुँचते ही वहाँ के कर्मचारियों ने जिस मुस्कान से स्वागत किया, लगा ही नहीं कि हम मुम्बई पहली बार आ रहे हैं. फ्रेश होकर खाना खाने के बाद वरुण आराम करने लगा और हमने सोचा कि अनिता दी और आशीष को फोन किया जाए. दोनों के फोन आने की एक रात पहले चैट में मिल चुके थे सो उनसे बात करके मन खुश हो गया.
गूगल अर्थ में स्टडी करके यह तो पहले ही जान चुके थे कि लोग दूर दूर रहते हैं और आने जाने की दिक्कत होती है तो किसी से मिल पाने की आशा तो थी नहीं. जब अनिता दी और आशीष ने मिलने की बात की तो खुशी का ठिकाना न रहा.
सुबह उठते ही हम डॉक्टर से मिलने गए. होटल से जल्दी ही हमें अस्पताल में दाखिल होने को कहा गया. उसी दोपहर को बोरिया बिस्तर बाँध कर होटल से हॉस्पिटल आ गए. डॉक्टर से लेकर कमरे की सफाई करने वाले सभी के चेहरों पर मुस्कान देखकर हम प्रभावित हो रहे थे. आधा दुख तो उसी मुस्कान से दूर हो गया. वैसे भी अगर दूसरे के दुख-दर्द देखो तो लगता है कि अपना आधा दुख भी न के बराबर है. वरुण की सर्जरी होते होते टल गई. फ़िज़ियोथेरैपी शुरु हुई और नई दवाएँ लेने को कहा गया.
अनिता दी से पहली मुलाकात अस्पताल में हुई .लगा ही नहीं कि हम पहली बार मिल रहे हैं. 25 जनवरी को फिर मिलने का वादा किया तो हम चहक उठे. कॉलेज के काम के कारण 25 की बजाय
26 जनवरी मिलना तय हुआ. तब तक हम अस्पताल से डिस्चार्ज़ होकर एयरपोर्ट के नज़दीक अन्धेरी ईस्ट के एक होटल में आकर ठहरे थे. पता चला कि आशीष भी आ रहे हैं. बातों बातों में अनिता दी ने जान लिया था कि वरुण को मटन बिरयानी पसन्द है. फिर क्या था बस 26 जनवरी हमने अनिता दी की बनाई मटन बिरयानी और गोभी के पराँठों के साथ मनाई.



आशीष भी समय पर पहुँच गए थे. वरुण और उसके बचपन दो मित्रों के साथ आशीष भी उन्हीं में से एक लग रहे थे. आशीष कम बोलते हैं लेकिन जो बोलते हैं पते की बात होती है. इतनी छोटी उम्र में बहुत कम युवा ऐसे होते हैं जो सोच समझ कर नपी तुली बात करें.
26 जनवरी की शाम न चाहते हुए भी दोनों से फिर मिलने का वादा करके विदा ली क्योंकि दोनो को ही अपने अपने घर दूर जाना था.
अनिता दी का सरल स्वभाव और मुक्त हास उनके व्यक्तित्व को चार चाँद लगा देता है. कविता के रूप में कुछ कहने को जी चाहता है.

उसके उज्ज्वल मुख पर इक आभा है
और दीप्तीमान नेत्रों में इक आशा है !
उसे देख मन की कलियाँ खिलतीं
कभी किसी को काँटे सी न चुभती !
जगती के प्रति स्नेह और करुणा है
ह्रदय में आनन्द की अमृत रसधारा है !
उसके उज्ज्वल मुख पर इक आभा है
और दीप्तीमान नेत्रों में इक आशा है !
लेकिन अभी कुछ और भी .......
क्रमश:

20 comments:

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

वरूण के विषय मे जानकर संतोष हुआ।

यह ब्लाग की महिमा ही कही जायेगी जो इतने सारे अनजान लोगो से हम परिवार की तरह मिल पा रहे है। चलिये अब त्रिपदम हो जाये, एक बार फिर से।

Sanjay said...

मुंबई यात्रा से वापस लौटने पर आपका स्‍वागत है. यात्रा का उद्देश्‍य किस हद तक सफल रहा बताएं. वरुण के बारे में जानने की उत्‍सुकता है. आशा करता हूं कि वह इस यात्रा से लाभांवित होगा. अनिता जी का वृत्तांत पढ़ लिया था अब आपकी बारी है. त्रिपदम् को बहुत मिस किया.

Sanjay said...

मुंबई यात्रा से वापस लौटने पर आपका स्‍वागत है. यात्रा का उद्देश्‍य किस हद तक सफल रहा बताएं. वरुण के बारे में जानने की उत्‍सुकता है. आशा करता हूं कि वह इस यात्रा से लाभांवित होगा. अनिता जी का वृत्तांत पढ़ लिया था अब आपकी बारी है. त्रिपदम् को बहुत मिस किया.

Gyandutt Pandey said...

आपके बच्चे का स्वास्थ्य कैसा है?

अनूप शुक्ल said...

अनीताजी से आपकी पहले दिन की मुलाकात का किस्सा उनके ब्लाग पर पढ़ा था। यह विवरण बहुत अच्छा आत्मीय लगा। बेटे के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिये मंगलकामनायें।

Dr.Parveen Chopra said...

पिछले हफ्ते अनिता जी की ही एक पोस्ट से आप के प्रिय बेटे की तबीयत के बारे में पढ़ा था...तब से ही विचार तो था आप से हाल जानने का....लेकिन बस यही ध्यान आता रहा कि हास्पीटल में आप को क्यों डिस्टर्ब किया जाए...पता नहीं वहां आप नैट एक्सैस कर पा रही होंगी कि नहीं....आज आप की पोस्ट से पता चला कि वरूण की सर्जरी होते होते टल गई। वह हमेशा स्वस्थ रहे, खुश रहे....और हां, ब्लोगिंग भी ज्वाइन करे....यही शुभकामनाएं एवं आशीषें हैं।

हर्षवर्धन said...

वरुण का स्वास्थ्य अब पहले से बेहतर जान पड़ता है। काम की व्यस्तता की वजह से चाहकर भी आपसे मिलने नहीं आ सका। मौका लगा तो फिर कभी मुलाकात जरूर होगी।

Parul said...

welcome back DI,varun ka khayaal rakhiye....

उन्मुक्त said...

बेटे जी ठीक होंगे, यही प्रार्थना।

mehek said...

meenakshiji,bahut achha laga y post padhkar.aasha hai apke varun ki health jald thik ho jaye.

Kakesh said...

वरुण शीघ्र स्वस्थ हो यही प्रार्थना है.

Shiv Kumar Mishra said...

अनिता दी के साथ आपकी मुलाकात का विवरण बहुत अच्छा लगा. वरुण जल्द ही स्वस्थ हो, यही कामना है.

Aflatoon said...

वरुण शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो। अनिताजी के स्नेहमय साथ का विवरण पढ़ कर खुशी हुई ।

mamta said...

अनिता जी की पोस्ट पर पहले पढ़ा था और आज आपकी पोस्ट पर आप लोगों की मुम्बई मे हुई मुलाक़ात के बारे मे पढ़कर अच्छा लगा।
वरुण जल्द ही पूरी तरह से स्वस्थ हो यही कामना करते है।
आप अपना और वरुण का ख़्याल रखियेगा।

आभा said...

न मिल पाने का दुख है....
वरुण जल्द से जल्द ठीक हो जाए
क्य़ा कहूँ बहुत कुछ........

आभा said...

न मिल पाने का दुख है....
वरुण जल्द से जल्द ठीक हो जाए
क्य़ा कहूँ बहुत कुछ........

कंचन सिंह चौहान said...

are waah...! aap 26 jan ko India me hi thi....? nice...! Anita Ji ke swabhav ki prashansha adhiktar blogs par mil hi jati hai...Varun ko ASHIRVAD

Sanjeet Tripathi said...

वेलकम बैक है जी!!
तो मस्त रही तो आपकी मुलाकात ब्लॉगर्स से, चलिए बढ़िया है!!
अनीता जी ने अपने शब्दों मे ब्यौरा दे ही दिया था पहले, अब आपके शब्दों में भी पढ़ लिया!!
वरूण के लिए शुभकामनाएं

Rachna Singh said...

वरुण शीघ्र पूरी तरह स्वस्थ हो।

anitakumar said...

वरुण से मिल कर हमें भी बहुत अच्छा लगा था, सच कहें तो उससे मिलने का लोभ भी हमें दूसरी बार वहां खीच लाया था बहुत ही प्यारा बच्चा है, और बड़ा हिम्मती भी, ठीक तो उसे होना ही है, उससे कहिएगा कि उसे देख कर हमें एक गाना याद आता है "ये कहानी है दिये की और तुफ़ान की" हम दिये के साथ हैं भगवान से सिफ़ारिश करेंगें …॥:0 जल्द ही उसके सवालों के जवाब लिखुंगी। अब उसे भी ब्लोगिंग में उतर आने का न्यौता दे रही हूँ, सिफ़ारिश आप कर दीजीएगा…॥:)