Thursday, January 3, 2008

आप सबके बड़प्पन को प्रणाम !

फुर्सत के पल मिलते ही अभी मैंने अपना मेल एकाण्ट खोला तो चेहरा खुशी से खिल उठा . मेल खोलते जा रहे थे और पढ़ते जा रहे थे. लगा कि मेल भेजते वक्त सबके चेहरे पर मुस्कान ही होगी जैसे राह चलते किसी को गिरते देख कर हँसीं निकल जाती है. सच मानिए कभी कभी गलती करके माफी माँगने का अलग ही आनन्द है.
कल शाम एक जन्मदिन की पार्टी पर छोटे बेटे को लेकर अजमान जाना पड़ा, लौटते लौटते रात के दो बज गए.
आज सुबह बड़े बेटे को लेकर कॉलेज गई जहाँ मुझे ठहरना था क्योंकि अक्सर एग्ज़ाम के दिनों में बेटे पर दर्द कुछ ज़्यादा ही मेहरबान हो जाता है. दोपहर एक बजे घर आते ही दोपहर खाना बनाया , खाया और खिलाया. न चाह कर भी नींद को अपने करीब आने से रोक नहीं पाए. अच्छी तरह मालूम है कि भोजन करने के एकदम बाद सोना ज़हर का काम करता है, फिर भी सो गए थे. उठने के बाद हालत खराब होनी ही थी सो हो गई.
तब सोचा कि अर्बुदा के हाथ की चाय पी जाए और नन्हे-मुन्ने जुड़वाँ इला इशान से खेला जाए तो तन-मन दोनो प्रफुल्लित हो जाएँगें. मीनू आटीं मीनू आटीं कहते हुए दोनों की होड़ लग जाती है कि सबसे ज़्यादा कौन अपनी बातों से लुभाएगा. एक मज़ेदार खेल होता है वहाँ. दोनो बच्चे अपनी प्यारी प्यारी बातों से हम दोनों को बात करने का अवसर ही नहीं देते लेकिन हम भी मौका पाकर अपनी बात कर ही लेते हैं.
वहाँ भी पैगी डॉट कॉम पर चर्चा हुई. सोचा कि चाय पीने के बाद तो ज़रूर इस विषय पर लिखना ही है.
जब सेहतनामा के संजय जी का मेल आया कि एक डोमेन का आमंत्रण मिला है तो हमारा माथा ठनका क्योंकि उससे पहले उस डोमेन पर विकास जी से भी बात हुई तब तक हम कुछ समझ नहीं पाए थे कि वे हमारे ब्लॉग परिवार के सदस्य हैं या कोई और .. आशा जी से निमंत्रण मिला था जिसे हमने उनकी साइट समझी और पैगी की पगली पढ़ लिया.
नहीं अब इस विषय पर बात करने का जोश ठंडा सा पड़ता जाता है . अब सोचते हैं "बीती बात बिसार दे , आगे की सुध ले" सो कल की बातें भुलाकर आज इस समय हमारे साथ कुछ गीतों का आनन्द लीजिए जो अभी मैं सुन रही हूँ --


दीवाना मस्ताना हुआ दिल........




जाता कहाँ है दीवाने ......




हूँ अभी मैं जवाँ ए दिल ......




जानूँ जानूँ रे ......

4 comments:

sunita (shanoo) said...

मीनाक्षी जी आप अकेले-अकेले चाय पी रहे हो यह अच्छी बात नही...अभी तो हम गाना सुन नही पायेंगे रात हो गई सब डिस्टर्ब हो जायेंगे मगर सुबह यही करेंगे...शुभ-रात्री...:)

Sanjeet Tripathi said...

क्या बात है आज तो बढ़िया बढ़िया गाने सुनवा दिए!!
शुक्रिया!!

अर्बुदा जी से कहिएगा हमारी चाय उधार रही :)

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

पैगी वाला मेल हमारे पास भी था। पर वह सब सीधा स्पैम में डाल दिया जाता है। उसे ले कर ज्यादा परेशान न हों।

सुचि said...

आज कल हर दिन आप ही की रचनाओं का आनन्द ले रही हूँ । आपका सशक्त लेखन मेरे अशक्त मन में नवीन चेतना का संचार कर देता है। नव वर्ष की शुभकामनओं के साथ,
सुचित्रा
कनाडा