Thursday, December 13, 2007

मेरे त्रिपदम (हाइकु)



मेरे पहले हाइकु का जन्म 26 अक्टूबर 2007 को हुआ जिसे एक तस्वीर के साथ अपने चिट्ठे पर लगाया. आपकी सराहना ने मेरे उत्साह को बढ़ावा दिया और हर दिन एक नए हाइकु का जन्म होने लगा. जापान के हाइकु कवि हाइकु लिखते समय 'सेजिकी' नाम का शब्दकोश पढ़ते हैं जिसमे उन्हें विभिन्न ऋतुओं अर्थात 'किगु' के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है.
चेरी ब्लॉसम ट्री जिसे जापानी भाषा में 'सकूरा' कहा जाता है, वह स्प्रिंग किगू कहलाता है. हाइकु के संग्रह को नाम देते समय जब जापान के हाइकु इतिहास का अध्ययन किया तो पाया कि प्रकृति से प्रेरित होकर हाइकू लिखे जाते हैं और उनमें चेरी के पेड़ की सुन्दरता तो सबके मन को मोह जाती है. हिन्दी मे चेरी ट्री को पदम(एक प्रकार का पेड़) भी कहा जाता है.
हाइकु तीन छोटी-छोटी पंक्तियों की पूर्ण कविता है इसलिए जो नाम मन मे उपजा, वह था त्रिपदम. त्रिपदम नाम देने के पीछे एक भावानात्मक कारण जुड़ा है. अब मैं अपने सभी हाइकु त्रिपदम के नाम से लिखूँगीं.

(The Japanese flowering cherry tree known as "Sakura" is one of the most loved trees in the world. Did you know over eight thousand Japanese cherry trees grace Washington D.C.? The trees were received in as gifts of goodwill and friendship from the people of Japan. Two American First Ladies were specifically honored by the gifts: First Lady Taft received 3020 trees in 1912, and First Lady "Lady Bird" Johnson received an additional 3800 trees in 1965. When the cherry trees are blooming, Washington is especially breathtakingly beautiful.)
स्वर्णमयी सी
धरा के हस्त धरा
कनक धन
* * * *
प्रकृति संग
चिंतन में डूबता
अकेला मन
* * * *
क्षितिज दूर
गगन धरा जुड़ें
दिवा स्वप्न है
* * * *
झीना आँचल
धूल धूसरित सा
धुँधला रूप
* * * *
फटा दामन
सूरज निकलता
हाथों से छूटा

19 comments:

arbuda said...

अच्छा नाम दिया है। हिंदी में त्रिपदम नाम जँच रहा है। सभी त्रिपदम सुन्दर हैं।

ज्ञानदत्त पाण्डेय । GD Pandey said...

अच्छा लिखा जी! हाइकू पढ़ने में अच्छे इसलिये भी लगते हैं, क्योंकि पढ़ने में समय कम लगता है और सोचने का मसाला ज्यादा मिलता है।
नामकरण भी अच्छा है।

anupam said...

tripadam vaah.........
now i shall also post tripam....
copyrite to nahi ha is naam ka..
main upyoga kar sakata hu kya TRPADAM naam ka....
kamlesh bhatt kamal ke bhi haiku read karana ji aap...

Sanjeeva Tiwari said...

वाह, सूरज, धरा और गगन का मिलन, मन ।
अच्‍छा लगा हाईकू पढ के आपका नामकरण त्रिपदम भी कमाल का है । हिन्‍दी में इसे त्रिपदम ही कहें सर्वमान्‍य ।

रंजू said...

क्षितिज दूर
गगन धरा जुड़ें
दिवा स्वप्न है


bahut sundar ..iske baare mein jaankaari bhi bahut acchi di hai aapne //yah vidha mujeh bhi bahut pasand hai ..

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

बधाई एवम शुभकामनाए इस नये नामकरण के लिये। अब त्रिपदम विशेषज्ञ मीनाक्षी जी को नये रंग मे पढने की चाह है। भगवान से प्रार्थना है कि आपका यह ब्लाग त्रिपदम ब्लाग के रूप मे सारी दुनिया मे सदियो तक जाना जाये। एक बार फिर शुभकामनाए।

Sanjeet Tripathi said...

सुंदर!!

वाकई एक बढ़िया नाम दिया है आपने।

रवीन्द्र प्रभात said...

शब्द ब्रह्म
सिंधु अथाह यह
यही हाईकू
आपके सारे हाईकू बहुत सुंदर और सारगर्भित है , हाईकू पर आपका विशलेषण भी प्रशंसा योग्य है , बधाईयाँ !

parul k said...

bahut khuub di..merey liye nayi vidhaa hai ye...magar bhaut bhaayi

Divine India said...

बहुत सुंदर!!

Rachna Singh said...

very nic e

अविनाश वाचस्पति said...

त्रिपदम में दम
तिगुना नहीं
सौगुना हरदम

बगीची said...

मानें जानें अब सब
वैचारिक उन्नयन
सिर्फ त्रिपदम

झकाझक said...

हाइकू दूर
त्रिपदम पास
मीनाक्षी की आस

तेताला said...

घना विश्वास
विचारों का सपना
त्रिपदम अपना

नुक्कड़ said...

नहीं उच्श्रंखल
न ही खलल
दमदार त्रिपदम

पवन चंदन said...

अपना सपना
त्रिपदम त्रिपदम
हाइकू कायकू

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

प्रतीकों से भरे
मीनाक्षी जी ने,
तीन पंक्तियों में,
तीन सौ लायक
जानकारी !!!

अनूप शुक्ल said...

सुन्दर नाम! अच्छे हायकू! हायकू बोले तो त्रिपदम!