Monday, October 29, 2007

नभ की सुषमा

अभी तो सूरज दमक रहा है. दिन अलस जगा है.
चंदा के आने का इंतज़ार अभी से क्यों लगा है !
बस उसी चंदा के ख्यालों में मेरा मन रमा है
नभ की सुषमा देखने का अरमान जगा है !
कविता के सुन्दर शब्दो का रूप सजा है
अब ब्लॉगवाणी पर पद्य मेरा हीरे सा जड़ा है !



नील गगन के नील बदन पर
चन्द्र आभा आ छाई !

ऐसी आभा देख गगन की
तारावलि मुस्काई !

नभ ने ऐसी शोभा पाई
सागर-मन अति भाई !

कहाँ से नभ ने सुषमा पाई
सोच धरा ने ली अँगड़ाई !

रवि की सवारी दूर से आई
उसकी भी दृष्टि थी ललचाई!

घन-तन पर लाली आ छाई
घनघोर घटाएँ भी सकुचाईं !

नील गगन के नील बदन पर
रवि आभा घिर आई !

ऐसी आभा देख गगन की
कुसुमावलि भी मुस्काई !

नील गगन के नील बदन पर
चन्द्र आभा आ छाई !

20 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

समयानुकूल बहुत सुंदर
तम को भगाए
प्रिय को लाए
चांद ऐसा करो जंतर।

ashish said...

सुंदर रचना

Sanjeet Tripathi said...

सुंदर

Basant Arya said...

सच कह रहा हूँ . अच्छा लगा

arbuda said...

बहुत प्यारा लिखा है। आज के दिन चिट्ठों की नगरी में चाँद की बातें खूब आकर्षक कर रही हैं। करवाचौथ की बधाई।

परमजीत बाली said...

बढिया रचना है।बधाई।

parul k said...

करवाचौथ की बधाई, dii bahut sundar paktiyaan....sach me aaj chandaa bahut satayegaa.suna hai hamarey yahan 8 bajey chamkegaa..aapkey yahan kab aayegaa?

Udan Tashtari said...

वाह जी, करवाचौथ की बधाइ हो आपको.

मीनाक्षी said...

आभारी हैं हम आपके
इतना स्नेह पाके !
आए मंगल जीवन मे आपके
प्रभु से यही दुआ हम माँगते !
Basant Arya said...
सच कह रहा हूँ . अच्छा लगा --- पहली बार आपकी टिप्पणी मिली .ज़रा विस्तार से समझाइए . अच्छा लगा भी कहते तो समझ आ जाता. या फिर कुछ झूठ भी है ...! :)

Divine India said...

हर एक स्थिति को आप ही कविता का आयाम दे सकती हैं… और सत्य यही एक कवि की निशानी है…
मैं जब भी आपकी कविता पढ़ता हूँ लगता है कल्पना की एक अस्पष्ट उड़ान में उड़ते हुए अंत तक साक्ष्य मिलने लगते हैं।

मीनाक्षी said...

दिव्यभ जी !
आपने तो हमें उड़ने के लिए पंख दे दिए. बहुत बहुत धन्यवाद !
मौन मेरा मुखरित हुआ ब्लॉग वाणी पाकर
प्रफुल्लित हुआ मन मेरा प्रशंसा आपकी पाकर !!

Mrs. Asha Joglekar said...

करवा चौथ की वजह से थी क्या ये चांद दर्शन की ललक ? कविता सुंदर है ।

Gyandutt Pandey said...

लेट ही सही; करवा चौथ की बधाई।

मीनाक्षी said...

ज्ञान जी, अनुभव होता है कि लिखने पढ़ने वालों के दिल के तार जुड़े होते हैं. टिप्पणी मिली तो बहुत अच्छा लगा , न मिलती तो भी आपके आस पास होने का आभास रहता है.
बहुत बहुत शुक्रिया !

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 21/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अशोक कुमार शुक्ला said...

Are waah!!...yaswant ji ne to samay yaan par teen saal pahle ki yaatra kara di.
Is anupam post ke liye badhai
aur badhai unhe bhi jinke liye. Aap is vrat ko rakhane ke loye prerit hui.

ana said...

bahut sundar

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत सुन्दर समयानुकूल रचना...
सादर बधाई...

मीनाक्षी said...

@यशवंतजी...पुराने पन्नों को ताज़ी हवा दिखाने के लिए शुक्रिया...
@शुक्लाजी...शुक्रिया...करवाचौथ का संयोग था वैसे प्रकृति के हर रूप से प्रेम अनायास कविता का रूप ले लेता है...
@अना...शुक्रिया
@संजयजी...शुक्रिया...

सदा said...

वाह ...बहुत खूब ।