Wednesday, October 3, 2007

सब हैं त्रस्त !

जीवन की जटिल समस्याओँ को
उलझते देख हम सब हुए हैँ
पस्त
कैसे सुलझाएँ उलझी गुथियोँ को
उलझते देख हम सब हुए हैँ
त्रस्त
अकेले ही इस जटिल जीवन को
जीने को हम सब हुए हैँ
अभिशप्त
दूर कर न पाते अपने दुखोँ को
पर सुख पाने की चाह मेँ हैँ
व्यस्त
लेकिन हे मन ----
आशा के सूरज को होने न देना
अस्त
शालीनता औ' मधुर मुस्कान
बिखेरते हुए रहना सदा
मस्त !!!
(बेटे विद्युत द्वारा बनाया चित्र अनुमति के साथ)

4 comments:

Udan Tashtari said...

शुभकामनायें-आशा का सूरज हमेशा दमकता रहे.

बालक विद्युत तो चित्रकारी में निपुण दिखते हैं, बड़ा ही उम्दा चित्र बनाया है. उन्हें भी हमारी बधाई दें.

Anonymous said...

app ney theek kaha Meenakshi ji
Jiwan main sub hain trast, jiwan ho gaya ast waist, mehangai kee maar say hain passt, Jina hai to rahoo MANST wran ho get zindgi jayee gee zindgi say shikast

Hindi Today said...

उम्मीद पर तो दुनिया कायम हैं। याद रहे,"जिन्दगी हर कदम एक नयी जंग है"……।

anitakumar said...

एक और प्रेरणादायक कविता…अति सुन्दर